April 19, 2026

कोरोना काल: संकट में गुज्जर जनजाति

भरत पटवाल भारत प्राचीन काल से ही बहुधर्मी, बहुजातियों, उपजातियों, बहुभाषियों, सामाजिक समूहों,जनजातियों की   समृद  परम्परा वाला देश रहा है। ...

लौकडाउन में फंसे पशु व पशुचारक

जयप्रकाश पंवार 'जेपी' किसी दौर में घुमंतू पशुचारक गुज्जर अफगानिस्तान व गुजरांवाला पाकिस्तान से होते हुए पहले कश्मीर व बाद...

इतिहास बनाता ‘वाह रे बचपन’

जयप्रकाश पंवार 'जेपी' हिंदी साहित्य के विकास में प्रयोगधर्मी लेखकों ने जो योगदान दिया है, वह खासकर लेखकों की नजर...

जहरीली शराब त्रासदी के परिपेक्ष

वीरेन्द्र कुमार पैन्यूलीउत्तराखंड आन्दोलन के सपनों को भी आघात पहुंचा है - जहरीली शराब त्रासदी के परिपेक्ष में उत्तराखण्डियों की...

उत्तराखंड में मलिन बस्ती नीति

वीरेन्द्र कुमार पैन्यूली उत्तराखंड में मलिन बस्ती अतिक्रमणों के लिए कोई नीति भी है कि या केवल राजनीति ही है।...

क्रान्ति के नायक – जयानन्द ‘भारतीय’

अरुण कुकसाल 6 सितम्बर, 1932 पौड़ी क्रान्ति के नायक- जयानन्द ‘भारतीय’ ‘गो-बैक मेलकम हैली’ ‘भारत माता की जय’ (more…)

बाॅलिवुड को भाया उत्तराखण्ड

ब्यूरोउत्तराखण्ड फिल्म शूटिंग के बेस्ट डेस्टीनेशन के रूप में उभर कर आ रहा है। तमाम फिल्म प्रोडक्शन हाउस, फिल्मों की...

25 अगस्त 1942 की सालम क्रांति

चंद्रशेखर तिवारी  1942 के दौरान कुमाऊं में चले ‘भारत छोड़ो‘ आंदोलन के तहत अल्मोड़ा की सालम पट्टी का महत्वपूर्ण योगदान...

वसुंधरा – उत्तराखंड की आधुनिक तीलू रौतेली

वेद विलास  क्यों कोई वसुंधरा बने इस उत्तराखंड में, उसने तीलू रौतेली के गांव गुराड़ में ले जाकर थियेटर खडा...