उत्तराखंड – सवाल खराब कानून व्यवस्था का ?
वीरेन्द्र कुमार पैन्यूली
खराब कानुन व्यवस्था और बदनामी चरम पर है, अब तक के राज्य के सबसे अक्षम गृह मंत्री के कार्यकाल में। बतौर गृृह मंत्री उनसे पद छोड़ने की मांग की शुरूआत गैरसैण विधान सभा सत्र मे तो होनी ही चाहिये।
23 मार्च 2026 को जब मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी, देहरादून में अपनी सरकार के चार साल बेमिसाल के आयोजन में भाग ले रहे थे। उसी तारीख पर देहरादून के एक निजी विश्वविद्याालय में पढ़ रहे, मुज्फ्फरनगर निवासी छात्र दिव्यांशु जटराणा की देहरादून में हत्या को अंजाम दिया जा रहा था। दूसरे छात्र गुट ने इसके लिये बाहरी राज्य से कातिल बुलवाये थे। इसके बाद किसान नेता राकेश टिकैत के आहवाहन पर, 3 अप्रैल 2026 को आशारोड़ी देहरादून चेकपोस्ट पर, दस बजे सुबह ही बागपत शामली मेरठ बड़ौत मुज्जफरनगर सहारनपुर बिजनौर पानीपत और हरिद्वार से हजारों की संख्या में किसान दिव्यांशु जटराना की शोक सभा में भाग लेने जमा हो गये थे। कई थानों की पुलिस प्रशासन और एस. एस. पी. प्रमेन्द्र डोबाल भी वहां पहुंच गये थे। उन्ही की मौजूदगी मुख्यमंत्री धामी को टिकैत खरी खरी सुना गये। अपने भाषण में टिकैत ने कहा, कि इन दिनों की घटनाओं सें देहरादून की छवि खराब हो रही है। शहर में नशे का कारोगार बढ़ रहा है। शैक्ष्णिक संस्थानों के आस पास, ड्रग्स का व्यापार प्रशासन की मिली भगत से हो रहा है। अपराधियों के हौसले बुलंद है।
हालांकि इसके पहले दिसमर 2025 दिल्ली जंतर मंतर में पूर्वोतर के छात्रों ने, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते सैकडों छात्र भी थे, देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की हत्या पर विरोध किया था व न्याय की मांग की थीै। यह भी राज्य की छवि पर गहरा आघात था। टिकैत जो कुछ सुना गये गये उत्तराखंड वासी तो शुरू से ही कह रहे थे व आज भी कह रहें हैं। परन्तु धकड़ धुरंधर जी सबकी अनदेखी व अनसुनी कर रहे थे। राकेश टिकैत ने बेलाग यह भी कहा था कि, बाहर वाले यहां बस रहें हैं। वे यहां अपराध बढ़ा रहें हैं और यहां के लोगों को पलायन करना पड़ रहा है। राजधानी देहरादून में नशे का इस कदर चलन बढद्व गया है कि युवाओं का भविष्य खोखला हो गया है। टिकैत ने लोगों से अपील भी की कि हम सब को मिल कर पहाड़ को बचाना होगा। कानून व्यवस्था दुरूस्त रहे इसके लिये राज्य सरकार को बहुत काम करना होगा। परन्तु धामी पर इसका क्या असर । ऐसी ही एक अन्य छात्र की हत्या पर, 31 दिसमर 2025 दिल्ली जंतर मंतर में पूर्वोतर के छात्रों ने जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते सैकडों छात्र भी थे. देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की हत्या पर विरोध किया व न्याय की मांग की थी। यह राज्य की छवि पर गहरा आघात था। पर धामी कहां चेते। दुष्यंत गौतम के विरोध में सिक्किम में, जहां के वे राज्यपाल बनाये गये है वहां के वकीलों छात्रों ने मोर्चा खोल दिया, वे अंकिता भण्डारी हत्या के चार साल से ज्यादा पहले हत्या में उन पर लगाये गये आरोपों को मुद्दा बनाये हुये हैं। पर जिस राज्य में यह बेहद बर्बर निंदनीय घटना हुई उस राज्य के मुख्यमंत्री ने गौतम को संवैधानिक पद दिये जाने का कोई विरोध नहीं किया।
अंकिता हत्याकाण्ड के चार साल से ज्यादा समय होने के बावजद, दिल्ली में अंकिता भण्डारी के माता पिता केा अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिये इण्डिया गेट पर बुधवार 14 अक्टूबर सायं को धरने पर बैठना पड़ा। उनकी मांग थी, जब तक वी. वी. आई. पी. का पता नहीं चलता, तब तक संदिग्ध को संवैधानिक पद न दिया जाये। उनका सीघा इशारा दुश्यंत गौतम पर था, जिन्हे दो दिन पहले ही सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। संवैधानिक पद मिलने के बाद संदिग्ध को जांच के धेरे में लाना और भी मुश्किल हो जायेगा। उनके न्याय पूर्ण प्रदर्शन को कुचलने के लिये गुरूवार सुबह उन्हे हिरासत में भी लिया गया था। कुछ घण्टों के बाद फिर छोड़ दिया गया। पर उनकी गिरफतारी पर भी धामी चुप रहे। आपत्ति व संवेदनाओं का धामी से बेहतर मिसाल तो सिक्किम के विश्वविद्यालय के छात्रों ने दी है।उन्होंने दुष्यंत गौतम के 2022 के अंकिता भण्डारी हत्या काण्ड में विवादित रहने के कारण, राष्ट्रपति द्रौपदी से सिक्किम का राज्यपाल न बनाने की अपील की है। अढिग अंकिता भण्डारी के माता पिता तो यहां तक कह गये थे कि, यदि उन्हे दिल्ली में प्रदर्शन करने से रोका जायेगा वे अपने घर में भूख हड़ताल करेंगे। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी, इण्डिया गेट में पहुंच समर्थन ही नहीं दिया बल्कि राष्ट्पति को भी अंकिता भण्डारी के माता पिता की मांग के बारे में पत्र भी लिखा है।
स्मरण रहे कि उन्नीस वर्षीय अंकिता भण्डारी की हत्या 18 सितम्बर 2022 को कर दी गई थी। 25 सितम्बर को चीला नहर में शव मिला। वह ऋषिकेश के पास भाजपा नेता परिवार के वनतारा सिोर्ट में रिसेप्सनिश्ट थी। अंकिता भंडारी हत्या, कहा जाता है कि वी. वी. आई. पी . को विशिष्ट देने का विरोध करने पर की गई। देहरादून में भी 13 अक्टूबर को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाये जाने के विरोध में गांधी पार्क में सत्याग्रह कर वी. वी. आई. पी. की भूमिका की जांच की मांग की। सिक्किम के राज्यपाल बनाये गये दुष्यंत गौतम तब राज्य के भाजपा प्रभारी थे। दुष्यंत गौतम से पूछताछ की मांग सालों से हो रही है। बाद में चुपके से दुष्यंत गौतम व एक अन्य संदिग्ध को चुपचाप उनके प्रमुख राजनैतिक दायित्वों से हटा दिया गया। अंकिता न्याय मंच भी सी. बी. आई. की धीमी जांच से नाखुश है। विधान सभा चुनाव तक तो मामला लटकना तय है। धामी का विशुध्द एजेण्डा अपने दल या केन्द्र पर कोई आंच न आने देने का होता है। 27 फरवरी कोे कहा कि जिस व्यक्ति ने अपने नाम केसाथ मुहम्मद लगाया राहुल गांधी उसके साथ पार्टी कर रहें हैं। क्या किसी राज्य के मुक्ष्यमंत्री को क्या इस स्तर तक पहुंच जाना चाहिये कि, कोई अपना नाम किस तरह से रखे उस पर टिप्पणी करे।मूल बात पर जाइये कि वह व्यक्ति एक दुकारनदार बुजुर्ग को भीड़ के आक्रोश से बचाने सामने आया था। जिसकी आज बहुत कमी दिखती है। बुजुर्ग भी कोई बाहर से आया व्यक्ति नहीं, बल्कि उसने स्वयं की पैदाईस कोटद्वार की बताई थी। क्या भीड़ से बुजुर्ग के बचाने के व्यवहार को आप गलत मानते हैं। चाहे बचाने वाले का नाम कुछ भी हो धर्म कुछ भी हो। नाम की बात करें तो पश्चिमी उ. प्र. में इकबाल नाम हिन्दू भी रखते हैं मुस्लिम भी।
काग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्य सभा सांसद को भरी वेदना से, एक दलित होने के नाते उत्तराखंण्ड में उनके साथ के अपमानजनक व्यवहार को राज्य सभा में बताना पड़ा. एक सार्वजनिक सभा में उनके भाग लेने के बाद सभास्थल का शुध्दिकरण किया गया। दोषियों के खिलाफ एफ. आई. आर. नहीं की गई। राज्य सभा में भी खड़गे जी ने पीड़ा भरा वक्तव्य दिया। उनका कहना था कि उनके दलित होने के कारण शुध्दिकरण का कृत्य किया गया व दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। मुख्यमंत्री तरह तरह के किसी के गले न उतरने वाला स्पष्टीकरण देते रहे। कई दिनों तक पुलिस ने कुछ नहीं किया। संसद में मामला उठने के जब राज्य सरकार की बहुत थू थू हुई, तो मजबूरन एफ आई आर दर्ज करनी पड़ी। यही गृह मंत्री धामी राजनीति को दर किनार कर यदि पहले ही कांग्रेस के कहने पर एफ. आई. आर. कर देते तो राज्य की छवि तो न बिगड़ती। उन्नीस जुलाई 2026 को, दिल्ली सी. जे. पी. के जंतरमंतर प्रदशर्न में जाने वाले ऐक्टिविस्टों को रोका गया। इसी क्रम में 19 जुलाई जंतर मंतर जाते, उत्तरखंड परिवर्तन पार्टी अध्यक्ष प्रभात घ्यानी को गैरकानूनी ढंग से ऋषिकेश में हिरासत में लिया गया। नैनीताल हाईकोर्ट में जब मामला पहुंचा, तो जस्टिस रवीन्द्र मैठाणी और जस्टिस सिध्दार्थ शाह ने राज्य प्रशासन को अभूतपूर्व करारी लताड़ लगाई। नैनीताल उच्च न्यायालय में इस गैर कानूनी काम को सरासर गुण्डागर्दी कहा। उनका कहना था कि एक नागरिक देश में कहीं भी जा सकता है। आप रोकने वाले कौन होते हैं। फिर प्रभात ध्यानी को छोड़ा गया। राज्य के गृह मंत्री पर यह परोक्ष टिप्पणी थी। पुलिस महकमा उनके पास रहता है। परन्तु उनके लिये तो यह आई गयी बात है।
बाहरी राज्यों की गैंगवार अब देहरादून में तय होती है। बाहरी अपराघी देहरादून में आकर खूब फलते फूलते हैं। सालों तक उनका पता नहीं चलता। वह तो जब उनके राज्यों की पुलिस उन्हे दबोचने राज्य में आती है तब पता चलता है। विक्रम शर्मा देहरादून सिल्वर सिटी जिम से बाहर मारा जाता है। वह अन्य राज्यों में कुख्यात अपराधी था। किन्तु वह सालों से काशीपुर में स्टोन क्रशर का कारोबारी था। खुद की उसकी लाइसेन्सी रिवाल्वर भी थी। विक्रम शर्मा हत्याकाण्ड में भी सुपारी पाये किलर बाहर से ही आये। मार कर बिना हड़बड़ाहट के पैदल चलते बाहर फरार हुये थे। ऐसी लचरसुरक्षा व्यवस्था थी राज्य की। दिल्ली पुलिस ने जब पांच अप्रैल 26 को अंतरराज्यीय नकली दवाइयों का बनाने, भडारण और वितरित करने का एक नेटवर्क पकडा था, तो उसका प्रमुख सदस्य उत्तराखंड में था। अवैद्य व्यापार के लिये नकली इनवाइस भी बनाये जाते थे। इसके बाद हाल में बंगलूरू में करोड़ों रू की ब्रैंडेड नकली दवाइयों के कारोबार पर हुये छापे में भी पता चला देश के तीन राज्यों में बनी नकली ब्राण्डेड दवाइयां ही पैकेज कर वितरित की जा रहीं थीं। उनमें उत्तराखंड भी एक था।
बाहरी राज्यों के अवैद्य हथियार यहां ला उन्हे वैधानिक बना फिर वापस बाहरी राज्यों मे बेचने के मामले भी राज्य में उजागर हुये हैं। सायबर ठगी सट्टे बाजी के लिये बाहरी राज्य वाले यहां कॉल सेंटर बना रहें व पकड़े भी जा रहें है। बाहर से देहव्यापार के लिये महिलाओं को बुलाने वाले गैंगों की भी यहां जड़ें हैं। नशीली दवाइयों का बाहर से आने वाली खेप हजारों लाखों रूपये में ही नहीं करोड़ों में की हो रही है। कुकर मुत्ते की तरह पकडत्रे जाने पर फिर पनप जा रहें है।
एक विश्वप्रसिध्द मंदिर के लिये नकली घी की खेप होयहां तैयार हो रही थी। चार साल के बाद किये गये मंत्रिमण्डल विस्तार के बाद भी, गृह मंत्रालय अभी मुख्यमंत्री के पास ही है। और अपराध बदस्तूर जारी रहें। 28 मार्च को ऋषिकेश के एक होटल में चालीस लोग, जिसमें महिलायें भी थीं जुआ खेलते शराब पार्टी करते पकड़े गये थे। इसके बाद आई. डी. पी. एल. पुलिस चौकी के बारह लोग निलम्बित किये गये थे। हवालात में मौत हुई। महिलाओं बच्चियों पर तो अपराध बढ़ हैं। सेवा निवृत ब्रिगेडियर मुकेश जोशी देहरादून के जोहड़ी में एक क्लब में दो गुटों में हुआ विवाद के बाद चलती गोलीबारी में मारे गये थे। कैंची धाम मेला शुरू होने के पहले चुलिस वाले महिला से छेड़छाड कर देते हैं। घटना के दो दिन भी नहीं बीतते हैं कि, कर्ण्रप्रयाग में स्थानीय लोगों परे सिख यात्री तलवार ले टूट पड़ते हैं ,उन्हे लहू लूहान कर देते हैं। यही नहीं सारी सीमा सील होने पर भी निहंग हिमाचल के रास्ते देहरादून मदद के लिये पहुंच जाते हैं। फिर अपने शर्तों पर लौटते हैं।निहंग रुद्रप्रयाग नगरासू में कब्जा कर एक श्रध्दालु को बंधक बना दिये थे। महिलाओं की भी हत्या करनी हो, चाहे पत्नी की हो या मित्र की उत्तरखंण्ड में आकर होटल में या गेस्ट हाउसों में कमरा लेकर ऐसा करना बाहर वालों को आसन लगता है। ऐसा कई बार हुआ है। कुछ माह पहले कैंचीधाम मंदिर में दर्शन के बाद, जब एक व्यक्ति ने अपने व्ष्वसायिक महिला पार्टनर की मौत को अंजाम देने के सन्देह के घेरे में था। ताजा ताजा ये आर .टी. आई. खुलासा मीडिया में आया है कि, कुमांउ में डेढ साल में 528 दुष्कर्म 157 अपहरण और 102 हत्यायें दर्ज हुंईं। बाहरी हुड़दंगियों का उत्पात तो है ही, तभी तो मुख्य सचिव स्पष्ट रूप से अपने अधिकारियों को ये निर्देश देते हैं कि, वीक एंड्स पर हुड़दग्गियों पर लगाम लगाया जाये। कुल मिलाकर खराब कानुन व्यवस्था और राज्य की बदनामी चरम पर है। अब तक के राज्य के सबसे अक्षम गृह मंत्री के कार्यकाल में, बतौर गृृह मंत्री उनसे पद छोड़ने की मांग की शुरूआत गैरसैण विधान सभा सत्र मे तो होनी ही चाहिये।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामजिक कार्यकर्त्ता व पर्वतीय चिंतक हैं.
