तीरथ जैसे मुख्यमंत्री की जरुरत थी उत्तराखंड को

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जयप्रकाश पंवार 'जेपी'

पिछले चार दिनों की उहापोह का पटाक्षेप आखिरकार हो ही गया.

भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने एक चौकाने वाले फैसले से, सारे अनुमानों को ध्वस्त करते हुए निहायत ही एक ऐसे बेदाग़ छवि के नेता को नये मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया जिनकी न कहीं चर्चा थी, न कोई मीडियागिरी चल रही थी, न कहीं शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा था. भाजपा के इस निर्णय से उत्तराखंड की जनता काफी राहत महसूस कर रही है. तीरथ सिंह रावत का राजनैतिक इतिहास पार्टी के एक समर्पित व जमीनी नेता के रूप में रहा है, जो आज की टंटे बाजी, धड़ेबाजी, मीडियाबाजी, भ्र्स्टाचारी, ठेकेबाजी, तड़कबाजी, हड़कबाजी वाली राजनीति से कोसों दूर रहे हैं. दरअसल उत्तराखंड की राजनीति को ऐसे ही मुख्यमंत्री की तलाश थी, जो दुर्भाग्य से देर सही पर पूरी हुई. प्रसिद्ध लोकगायक श्री नरेंद्र सिंह नेगी ने शायद ऐसे ही मौकों के लिए ये गीत गाया होगा. "देर होली, अबेर होली, होली जरूर सबेर होली". देर होगी पर भाइयों एक दिन जरूर सुबह होगी.

ठेठ पहाड़ी संस्कारों से भरपूर उत्तराखंड के दसवें मुख्यमंत्री श्री तीरथ रावत का जन्म 9 अप्रैल 1964 को ग्राम सिरों, पट्टी असवालस्युं, जनपद पौड़ी गढ़वाल में एक साधारण परिवार में हुआ था. अपनी पढ़ाई के दौरान वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए व पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में श्रीनगर गढ़वाल आ गये जहां वे प्रचारक की भूमिका निभाने के साथ - साथ हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विस्वविध्यालय से उच्च शिक्षा भी प्राप्त करते रहे. 1988 में संघ ने उन्हें अपनी छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के संगठनकर्ता के रूप मैं दायित्व प्रदान किया. तीरथ रावत ने यह कार्य बड़ी मेहनत व लगन से किया. वह दौर कांग्रेस का था. भाजपा, विद्यार्थी परिषद्, संघ जैसे नामों से लोग परिचित भी नहीं थे. बड़ी कुशलता से तीरथ ने विद्यार्थी परिषद संघठन का विस्तार पूरे उत्तराखंड में किया. उस दौर में विद्यार्थी परिषद के बैनर तले छात्र नेता छात्र संघ का चूनाव लड़ने से कतराते थे. इस चुनौती को तीरथ ने खुद स्वीकार कर गढ़वाल विस्वविध्यालय छात्र संघ का चूनाव लड़ा. दो बार हार का सामना करना पड़ा, डटे रहे व तीसरी बार में छात्र संघ के अध्यक्ष चुन लिये गये. यह जीत विद्यार्थी परिषद, भाजपा व आनुसांगिक संगठनों के लिए संजीवनी बनी, फिर तो गढ़वाल व कुमाऊं विश्वविद्यालयों के छात्र संघों में विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता चुनाव दर चुनाव जीतते रहे जो सिलसिला आज भी जारी है. इसका परिणाम ये रहा कि कांग्रेस के बाद उत्तराखंड में भाजपा प्रमुख दल के रूप में उभरा.

रामजन्म भूमि आंदोलन में सक्रीय भूमिका निभायी. 1991 के उत्तरकाशी भूकम्प राहत कार्यों में तीरथ ने विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ उल्लेखनीय काम किया. इसी वर्ष मेरठ के सम्मेलन में तीरथ रावत के नेतृत्व में पृथक उत्तराखंड राज्य का प्रस्ताव भी पारित किया गया. तीरथ के इस समर्पण व योगदान को देखते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 1993 हैदराबाद में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में परिषद का राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया. 1994 में तीरथ फिर पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रीय हो गये. इसके बाद तीरथ को उत्तर प्रदेश भारतीय युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया. 1997 में तीरथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सदस्य बने. 9 नवम्बर 2000 को पृथक राज्य बनने पर पहली सरकार में शिक्षा मंत्री बने व शिक्षा मित्रों की नियुक्ति का रास्ता निकाला जिनमें से अधिकांश युवा आज सरकार में सेवारत हैं. उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनावों में पौड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े व बहुत कम अंतर से निर्दलीय विधायक यशपाल बेनाम से हार गये लेकिन प्रदेश महामंत्री के रूप में संघठन का काम बखूबी करते रहे. तीरथ सतत रूप से सक्रिय रहे व पौड़ी विधानसभा सीट के आरक्षित होने पर 2012 में चौबटाखाल से विधानसभा का चुनाव लड़ा व जीते.

तीरथ के सांगठनिक कौशल को देखते हुए उनको 2013 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया. सन 2017 के विधानसभा चुनाव में सीटिंग विधायक होने के वाबजूद तीरथ की जगह सतपाल महाराज को चौबट्टाखाल से चुनाव लड़ाया गया. उस वक़्त राजनीतिक पंडितों ने तीरथ के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगा दिये थे. लेकिन संघठन ने उनके समर्पण व सांगठनिक क्षमता को देखते हुए राष्ट्रीय सचिव की और बड़ी जिम्मेदारी देकर कृतार्थ किया, हिमांचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया व हिमांचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी. सन 2019 के संसदीय चुनावों में तीरथ की स्वाभाविक दावेदारी थी लेकिन बड़े दिग्गज एक बार फिर सामने आ गये आखिरकार एक बार फिर नेतृत्व ने तीरथ को आजमाया जिस पर वो खरे उतरे व पौड़ी लोकसभा सीट से संसद पहुँच गये व आज 10 मार्च 2021 को उत्तराखंड के 10 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. सौम्य, सज्जन व व्यवहार कुशल तीरथ सिंह रावत अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री है व उनकी असल परीक्षा आज से सुरु होने जा रही है. तीरथ जी को भविष्य की ढेर सारी सुभकामनायें.

Photo - Dr. Arun Kukshal

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