April 6, 2025



आशा की एक किरण

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महावीर सिंह जगवान 


हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपद रूद्रप्रयाग मे जनपद सृजन के बाद पहली बार


पहाड़ी ढलानों पर रचे बसे गाँवों मे पहाड़ जैसी दुरूह और विकट जीवन जी रहे वशिन्दों के चेहरे पर एक मंद मंद मुस्कराहट स्पष्ट झलकती है। यह मुस्कारहट उन सवालों के समाधानों की आस है जिसमे उसके पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो, शिक्षा के मन्दिर मे ब्यवस्था ऐसे बने जिससे उसके लाडले ढंग से पढ पायें, अस्पताल मे उसका इलाज सहजता  से सम्भव हो, सरकारी कार्यालयों मे आम आदमी के काम विना कागजी मकड़जाल और मातहत की अकड़ के विना सही समय पर गम्भीरता से समय पर पूर्ण हों। इन प्रारम्भिक महत्वपूर्ण समाधानों हेतु ग्राम पंचायत मे वार्ड सदस्य, प्रधान, क्षेत्रपंचायत, जिला पंचायत, विधायक, सांसद जैसे अतिमहत्वपूर्ण ओहदे हैं जिनका प्रथम लक्ष्य ही उपरोक्त सवालों के समाधान और जमीनी स्तर पर ऐसा वातावरण विकसित करना ताकि लोकतन्त्र की खुशबू हर घर के आँगन मे महके देश की तरक्की का अहसास उसकी मूलभूत सुविधाऔं के शसक्तीकरण से हो। पीड़ा इस बात की है जनता की नुमाइन्दी करने वाले हर निर्वाचित पटल निरन्तर सेवा से हटकर रोजगार का एक बड़ा क्षेत्र बन गया है। जनप्रतिनिधि जनसरोकारों को गम्भीरता से नही ले रहे हैं यह कड़वी सच्चाई है। हाँ जनप्रतिनिधि हर उस योजना के लिये जी जान से लगें हैं जिसमे ठेकेदारी जरूर हो, मोटा रूपया अन्दर हो और योजना समय से पहले निम्न गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के कारण समय से पहले दम तोड़ दे।उत्तराखण्ड मे यह आम बात है राजनीति ठेकेदारों के कब्जे मे ही फलती फूलती हैं। सत्तायें बदलती हैं लेकिन ठेकेदारों की शक्ति के सम्मुख सदा सत्तायें नतमस्तक रहती हैं। हाल ही में ठेकेदार संघठन का एक मामला गर्माहट मे था। माननीय विधायक जी ने समाधान की पहल की तो एक शक्तिशाली कैबिनेट मन्त्री जी ने साढे तीन घण्टे मे अपनी शक्ति के बलबूते शासनादेश ही बदलवा दिया, आम जनता के हितों की बाट जोह रहे विधेयक आज भी विधान सभा के पटल से पहले ही दम तोड़ देते हैं। उदाहरण इसलिये अपरिहार्य था जनता का प्रतिनिधि विना स्वहित के जनसेवा मे कन्जूसी कर रहा है, कुछ विरले सम्मानित जनप्रतिनिधायों को छोड़कर यह सौ फीसदी सत्य है।


रूद्रप्रयाग जनपद का वासी हूँ निरन्तर जनसंवाद से आम जन के चेहरे पर मंद मंद मुस्कारट और अंतस मे स्वाभिमान की झलक दिखती है, बारीक पड़ताल से स्पष्ट होता है तकलीफ मे हर कोई है फिर भी जब से आदरणीय जिलाधिकारी मंगलेश घिल्डियाल जी आयें हैं आस और विश्वास जरूर बढा है। आदरणीय जिलाधिकारी जी ने जिस तत्परता से जनता की समस्याऔं का निराकरण किया है निसन्देह यह एक उजाले की किरण है। सुदूर प्राथमिक विद्यालय मे एक समर्पित एकल शिक्षक अपने वृद्धपिता के विगड़ते स्वास्थ्य का इलाज इसलिये नहीं कर पा रहा था क्योंकि शिक्षा विभाग उसकी जगह पर पाँच दिन के लिये भी प्रतिस्थानी भेजने मे लाचार जबाव दे गया, जैसे ही जिलाधिकारी महोदय तक सूचना पहुँची महोदय ने संज्ञान लिया और प्रतिस्थानी पहुँच गया। जनपद के होनहार छात्रों से सीधा और प्रेरक, गढवाली मे संवाद आज भी छात्रों को उत्साहित करता है। जनपद मुख्यालय मे स्वच्छता पर स्वयं द्वारा दशको से जमा गन्दगी की सफाई की शुरूआत जो सभी को प्रेरणा दे रही है। जनपद के सभी तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थलों को चिन्हित कर उनके विकास और प्रचार प्रसार के लिये राज्य और भारत सरकार के साथ ही विदेशों मे स्थित भारतीय दूतावासों तक सूचना का सक्षम पटल विकसित करने की बड़ी पहल। राजकीय प्राथमिक विद्यालयो मे छात्रों के हितों की पैनी पड़ताल उनके बीच पहुँचकर नन्हे विद्यार्थियों संग जमीन पर बैठकर भोजन करना, बातें करना और उनका मार्गनिर्देशन करना । विश्वप्रसिद्ध ज्योर्तिलिंग केदारनाथ जी मे स्थानीय उत्पादों पर आधारित प्रसाद के लिये स्थानीय समूहों और लोगों को चिन्हित कर बड़ी शुरूआत। सुदूर गाँवों तक पैदल पहुँचना, विकास की पड़ताल करना, जन संवाद के साथ समस्याऔं के निराकरण हेतु तत्काल पहल करना । गाँव कस्बों मे चौपाल लगाकर संवाद से समाधान और सृजन के नये संकल्पों का श्रीगणेश वाकई रोचक और सामाजिक उन्नयन की बड़ी पहल है। एक बार आदरणीय जिलाधिकारी जी गर्ल्स इण्टर कालेज गये और जब पता चला पूरे सब्जैक्ट टीचर नही हैं, स्वयं अपनी धर्मपत्नी से विषय की गम्भीरता को साझा कर जब तक पद खाली है आपकी (जिलाधिकारी) की धर्मपत्नी वहाँ पर निशुल्क शिक्षा दान कर रही हैं जो प्रेरक पहल है।

अभी कुछ दिन पहले किसी पेसेन्ट के साथ जिला चिकित्सालय गया था, आदरणीय जिलाधिकारी जी अपने परिवार के साथ अस्पताल आये उनकी गोद मे बालक था जिसे फीवर की शिकायत थी उसका चैकअप करवाकर उसे घर भेज दिया और स्वयं वहीं से ड्यूटी पर निकल पड़े। सूचना मिली मेदनपुर गाँव मे भी बैठक थी, यह वही गाँव है जहाँ सन 2000 मे मेरे द्वारा पीढियों से बन्जर जमीन पर इस्राइल हार्टिकल्चर पैटर्न द्वारा उद्यानिकी का एक सफल माॅडल विकसित किया गया जिसकी तीन साल से अधिक समय तक हमने हेर देख की। आज यह उद्यान भू स्वामी की आर्थिक का बड़ा जरिया है। गढवाल हिमालय मे यह शुरूआती सफल माॅडल है। यह आम और सिट्रस का बड़ा बाग तो है ही स्थानीय फोडर और वानिकी का भी बड़ा माॅडल है। यह अत्यधिक जैवविवधताऔं वाला सम्मन्न गाँव है। यहाँ आज से दो दशक पहले सालाना तीन लाख से अधिक के स्थानीय प्रजाति के केले विकते थे जो स्थानीय लोंगो का पशु धन केसाथ आजीविका का स्थानीय बड़ा श्रोत था। आदरणीय जिलाधिकारी जी जिस कर्मठता और लगाव के साथ समस्याऔं के समाधान और विकास को गति दे रहे हैं इसकी चारों प्रशंसा है। जनपद मे यदि किसी भी नागरिक के पास सकारात्मक और विकास के लिये आइडिया है उसे आप साझा कर सकते हैं, यदि वह जरूरी है तो पहल हो जाती है। गढवाली भाषा मे आम जन से संवाद और उनके समाधानों मे बड़ी उपलब्धियाँ जुड़ी हैं। आदरणीय जिलाधिकारी जी की कार्यप्रणाली से छुटभैय्या नेताऔं की नेतागिरी संकट मे है, यहाँ तक अन्दर खबर है नेता समस्याऔं के समाधान मे भी सम्बन्धित विभागों से जो दक्षिणा पाणी लेते थे वो भी बेरोजगार हो गये। मैने छोटे से बड़े ब्राण्ड के नेताऔं को कानाफूसी करते सुना है डीएम साहेब नेतागिरी कर रहे हैं मेरा विनम्र जबाब है जन सेवा का असली ठेका तो आप जैसे जनप्रतिनिधियों का है, आप निठल्ले के साथ जन सरोकारों पर तटस्थ रहोगे तो जनता का डीएम के शिवा कौन है। दोनो हाथ जोड़कर विनती है अपने अन्दर झाँको और समय रहते जनता और अधिकारियों के मध्य रचनात्मक सेतु बनाकर विकास की गंगा बढायें। भगवान बद्रीविशाल एवं बाबा केदारनाथ जी से आदरणीय जिलाधिकारी जी के शुभ मंगल शसक्त सफल भविष्य हेतु प्रार्थना।आपकी पहल उजाले की किरण है पर्वतीय जनपदों हेतु यह प्रकाश सदैव फैलता रहे।हार्दिक शुभकामनायें।


लेख़क युवा सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं