September 13, 2026

कठिन वक़्त का रचनाकार

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अरुण खुगशाल 

कवि मित्र कपिलेश भोज को आज जन्मदिन की बधाई और शुभ-कामनाओं के साथ उनके अब तक प्रकाशित दो कविता संग्रहों की पर समलोंण

साहित्य जगत की प्रतिष्ठित पञिका ‘वर्तमान साहित्य’ और ‘कारवां’ के संपादक रहे, कपिलेश भोज अध्यापक, राजनैतिक चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता और इन सबसे अलग कवि एवं कथाकार हैं। समाज में व्याप्त असमानता, गरीबी, शोषण और अंधविश्वास के खिलाफ हर समय मुखर एवं प्रखर कपिलेश अच्छे को अच्छा तो बुरे को बुरा कहने में कोई देरी और संकोच नहीं करते हैं। जीवन में आयी विषमताओं को सहजता से ‘परे हट’ कहने का वे हर समय साहस रखते हैं। साफ और स्पष्ट नजरिया रखने वाले कपिलेश सामान्य बातचीत में भी हमेशा संयमित एवं संजीदा रहते हैं। कपिलेश भोज जी के जन्मदिन पर उनकी प्रकाशित किताबों पर दो-चार बातें हो जाएं.

‘यह जो वक़्त है’- साहित्य जगत में चर्चित रहा ‘यह जो वक्त है’ कपिलेश भोज का प्रथम प्रकाशित कविता संग्रह है। इस कविता संग्रह के 4 खण्डों में समय-समय पर प्रकाशित उनकी 54 कविताएं हैं। पहले खण्ड ‘चीखती हैं नदियां’ में कुल जमा 16 कविताएं हैं। इनमें ज्यादातर कविताएं प्रकृति के विविध मिजाजों की ओर मुखातिब हैं। पहाड़, चिडिया, पेड-पौधे, हरियाली, पतझड़, नदी, शरद आदि के माध्यम से ये कविताएं अाम आदमी की जिंदगी में ताक-झांक करती हैं। दूसरी भाग में ‘कोई किसी को नहीं पुकारता यों ही’ में 9 कविताएं शामिल हैं। मानवीय मन की रंग-बिरंगी उडान को लिए इस हिस्से की कविताएं अपनी मधुर लय-ताल के साथ गीतात्मक हो गयी हैं। तीसरे खण्ड में ‘रोशनी को पाने से पहले’ में 15 कविताएं मौजूद हैं। यहां कपिलेश की कविताएं सामाजिक आडम्बरों पर प्रहार करती हुई आम आदमी के जीवन संघर्षों को कई आयामों में उद्घाटित करती हैं। कविता संग्रह के चौथे हिस्से में ‘किताबें लिए चल रहे हैं नौजवान’ की 14 कविताएं कवि के भविष्य के प्रति ऊर्जावान दृढ़ संकल्पों को लिए हुए हैं।

सामाजिक ताने-बाने पर सीधे एवं सलीके से लिखी कविताओं का यह संग्रह मानसिक विलास एवं विलाप से दूर सादगी की विशिष्ट महक लिए हुए है, जो कि पाठकीय आनन्द को हर पन्ने पर बनाये रखता है। वास्तव में कपिलेश भोज का कविता संग्रह ‘यह जो वक्त है’ की कविताएं समाज के नये दौर की ओर बढ़ते कदमों की आहटें हैं। यह कविता संग्रह पाठकों को एक खुशनुमा मुकाम की ओर से जाता है। ‘ताकि बसंत में खिल सकें फूल’ – इस कविता संग्रह में कपिलेश की 56 कविताएं आम आदमी के मन का कोलाहल और जीवन की थकान को विश्राम देती हैं। गिरीश तिवाड़ी ‘गिरदा’ को सर्मपित इस किताब की प्रत्येक कविता को जीवन में मिले मित्र, स्थान और संस्था के नाम किया है। यह कविताएं बताती हैं कि कोई व्यक्ति और स्थान कैसे किसी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को बनाने में असरदार हो जाते हैं। उत्तराखंड हिमालय की सोमेश्वर घाटी के बेबाक कपिलेश भोज ने देर से ही सही, बेहतरीन साहित्यिक सौगात हिन्दी साहित्य जगत को प्रदान की है। परन्तु कपिलेश भोज की उत्कृष्ट रचनाधर्मिता से अभी बहुत सारा आना बाकी है। यह प्रसन्नता की बात है कि आजकल कपिलेश भोज जी हिमालयी सामाजिक सरोकारों के अग्रज डॉ शमशेर सिंह बिष्ट जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर किताब लेखन में जुटे हैं। नि:संदेह यह किताब सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं को मान-प्रतिष्ठा प्रदान करेगी।