अपील चकबन्दी दिवस की

एल मोहन कोठियाल 

चकबन्दी आन्दोलन 4 दशक से जारी है। चकबन्दी से यहां के गावों को बसाया जा सकता है और हम कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में स्वावलम्बी बन सकते हैं

पर्वतीय भूभाग में खेतों को बचाने के लिये एक और कारण से उनका एकत्रीकरण करना बहुत ही जरुरी हो गया है। ऐसा इसलिये भी आवश्यक है कि यहां से बड़ी तेजी से पलायन हो रहा है। लगभग 3000 गांव खाली हो गये हैं और बाकी उसी राह की ओर जाते दिखते है। जो लोग आजीविका व भविष्य बनाने के लिये दिल्ली मुम्बई या दूसरी जगहों पर बस गये है की आगे की पीढ़ी को आज अपने गांव तक नाम मालूम नहीं रहे। जमीन की बात तो दूर। कुछ साल बाद हमारे सब के सामने यही समस्या आने वाली है। हमारे इस अनजानेपन का लाभ धीमे-धीमे भूमाफिया उठा ही रहा है। मैदान में जमीनों पर कब्जा करने के बाद उसकी निगाह पहाड़ की वादियां पर है। तराई देहरादून के बाद कुमायूं में नैनीताल, चम्पावत, अल्मोड़ा में जहां भी जायें वह बिकती जा रही है। गढ़वाल की पहाडियों पर ऐसा होता जा रहा है।

यही गांव ही हमारी पहचान है इनसे ही हमारी बोली भाषा संस्कृति बची है। उसको बसाने के लिये चकबन्दी की मांग लगातार जारी है। 20 साल पहले यदि किसी सरकार ने ऐसा किया होता तो अब तक परिणाम दिख सकते थे लेकिन ऐसा न हुआ जिससे और विसंगतियां पैदा हो गई। जहां जहाँ सड़कें गई वहां से पलायन और बढ़ा। हमारी सरकार 16 साल में एक भी सरसब्ज माॅडल ही तैयार कर पाई व एक भी गांव न बसा सकी। बस सपने इतने दिखाये गये कि अब उस पर से विश्वास उठ गया है। 

हर राजनीतिक दल चकबन्दी का पक्षधर है। लेकिन किस दल ने इस बात पर कभी बहस की ? शराब व खनन पर यह कभी चुप नहीं रहते है। विधान सभा सत्र तक स्थगित हो जाता है। वर्तमान सरकार ने भी चकबन्दी विधेयक इसीलिये पारित किया किन्तु उनकी मंशा इसे लागू करने की कभी नहीं रही। उसने दिये गये सुझावों पर कभी अमल नहीं किया क्यों कि उनकी प्राथमिकता में तो कुछ ओर ही रहता है। समय आ गया है कि चकबन्दी को गम्भीरता से लेना ही होगा।

हमें चकबन्दी की लड़ाई को अन्तिम मुकाम तक ले जाना है। गरीब क्रान्प्ति अभियान चकबन्दी दिवस के माध्यम से इस मांग को उठाने के लिये लगातार डटा हैं। 01 मार्च 2012 से यह लगातार मनाया जा रहा है। आइये आगामी 1 मार्च 2017 को हम इसे अपनी अपनी ओर जो जहां है वह वहां पर इसे मनाये। मोमबत्ती जलायें, अस्पताल में फल बांटें, रक्त दान करें, मदद करें, गोष्ठी करे, सरकार को पोस्टकार्ड लिखे, सरकार को ईमेल करेे, नहीं तो फेसबुक पर लाइक या कमेन्ट ही कर दें। पर सरकार से जरूर कहें कि कहा है तुम्हारा चकबन्दी मैनुअल जिसके आधार पर चकबन्दी को लागू करना संभव होगा। हमें सुरक्षित व सर्वमान्य चकबन्दी मैनुअल बनाने की दिशा में आगे बढऩा हैं। यह विधेयक यूपी के एक्ट से कहा भिन्न है। चकबन्दी दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली में एवं देहरादून में उपलक्ष्य में दो कार्यक्रम किये जा रहे हैं ताकि सताधीशों के कानों तक आवाज जा सके। सरकार कोई भी बने हमें अपनी आवाज को और गुंजायमान करना होगा। नहीं तो हम कहीं के नहीं रहेगें। अब चकबन्दी की लड़ाई सबकी लड़ाई है गरीब जी की सौ साल की आयु की कामना के साथ.

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

चैनल माउन्टेन, मीडिया के क्षेत्र मैं काम करने वाली एक अग्रणी एवं स्वायत्त संस्था है . जो की पिछले 21 सालों से सतत कार्यरत है.

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